दिल्ली। वित्त मंत्री ने बजट प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारत सॉफ्टवेयर विकसित करने की सेवाओं, सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाओं, नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग सेवाओं और सॉफ्टवेयर विकास से संबंधित अनुबंध अनुसंधान और विकास सेवाओं में विश्व में अग्रणी है। ये व्यापारिक भाग एक-दूसरे से बहुत जुड़े हुए हैं। इन सभी सेवाओं को एक ही श्रेणी ‘सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएं’ के तहत लाने का प्रस्ताव है, जिसमें सभी के लिए 15.5 प्रतिशत का कॉमन सेफ हार्बर लाभ लागू होगा। केंद्रीय बजट 2026-27 में सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं के लिए सेफ हार्बर का लाभ उठाने की सीमा को 300 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

वित्त मंत्री ने आगे कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं के लिए सेफ हार्बर को एक स्वचालित नियम आधारित प्रक्रिया से अनुमोदन प्रदान किया जाएगा, जिसमें कर अधिकारी को आवेदन पत्र की जांच करने और उसे स्वीकार करने की कोई आवश्यकता नहीं होगी। एक बार सूचना प्रौद्योगिकी सेवा कंपनी द्वारा आवेदन करने के बाद, उसी सेफ हार्बर को कंपनी की मर्ज़ी से लगातार 5 साल तक जारी रखा जा सकता है।
जो सूचना प्रौद्योगिकी सेवा कंपनियाँ एडवांस प्राइसिंग एग्रीमेंट (एपीए) करना चाहती हैं, उनके लिए वित्त मंत्री ने सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं के लिए फास्ट ट्रैक यूनिलैटरल एपीए प्रोसेस की घोषणा की और इसे 2 साल की अवधि में पूरा करने की कोशिश की जाएगी। करदाता के अनुरोध पर इस 2 साल की अवधि को 6 महीने और बढ़ाया जा सकता है। एपीए में शामिल होने वाली कंपनी को उसकी संबद्ध कंपनियों के लिए उपलब्ध संशोधित लाभ की सुविधा को भी बढ़ाया गया है।



