दिल्ली। भारत का नवाचार इकोसिस्टम कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तथा संबंधित गहन प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में व्यापक शैक्षणिक अनुसंधान निष्कर्ष का प्रमाण देता है। स्टैनफोर्ड ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी रिपोर्ट 2025 में एआई प्रतिस्पर्धात्मकता एवं पारितंत्र की सजीवता के संदर्भ में भारत को विश्व में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है। भारत, गिटहब पर एआई परियोजनाओं में दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता भी है, जो भारत की सक्रिय एवं सशक्त डेवलपर समुदाय को दर्शाता है।

इंडिया ए आई मिशन:
भारत सरकार ने मार्च 2024 में देश में समग्र एआई पारितंत्र के विकास के लिए 10,372 करोड़ रुपये के प्रावधान के साथ इंडिया ए आई मिशन का शुभारंभ किया। 24 माह से भी कम समय में इस मिशन ने देश में एआई इको सिस्टम के विकास के लिए एक सुदृढ़ आधार स्थापित किया है:
कॉमन कम्प्यूटिंग सुविधा के लिए 38,000 से अधिक जीपीयू उपलब्ध कराए गए हैं, जिन्हें भारतीय स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों को किफायती दरों पर प्रदान किया जा रहा है।
स्वदेशी आधारभूत मॉडल अथवा लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) के विकास के लिए 12 टीमों का चयन किया गया है।
भारत-विशिष्ट एआई अनुप्रयोगों के विकास हेतु 30 प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई है।
प्रतिभा विकास के लिए 8,000 से अधिक स्नातक, 5,000 स्नातकोत्तर तथा 500 पीएचडी छात्रों को सहायता प्रदान किया जा रहा है।
27 इंडिया डेटा एवं एआई प्रयोगशालाएँ स्थापित की गई हैं तथा 543 अतिरिक्त प्रयोगशालाओं की पहचान की गई है।
भारत, एआई के विकास, उपयोग और सुरक्षा से संबंधित वैश्विक विमर्श को दिशा देने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। भारत ग्लोबल पार्टनरशिप ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (जी पी ए आई) का संस्थापक अध्यक्ष रहा है। भारत 16 से 20 फरवरी 2026 के बीच नई दिल्ली में इंडिया ए आई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन 2026 की मेजबानी कर रहा है। ऐसा पहली बार है जब यह वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन श्रृंखला, ग्लोबल साउथ में आयोजित की जा रही है, जो अधिक समावेशी वैश्विक एआई संवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है।
ए आई में निजी क्षेत्र का निवेश
सरकार की पहलों से प्रोत्साहित होकर निजी क्षेत्र भारत में एआई में निरंतर निवेश बढ़ा रहा है। स्टैनफोर्ड एआई इंडेक्स रिपोर्ट 2025 के अनुसार, वर्ष 2013 से 2024 के बीच भारत में एआई क्षेत्र में कुल निजी निवेश लगभग 11.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा है।
गूगल ने हाल ही में आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) हब स्थापित करने की घोषणा की है। लगभग 15 बिलियन अमेरिकी डॉलर का यह निवेश भारत में अब तक का गूगल का सबसे बड़ा निवेश है।
टाटा समूह ने महाराष्ट्र में एआई नवाचार नगरी स्थापित करने के लिए 11 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश की घोषणा की है।
इंडिया ए आई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन के दौरान “एआई और उसका प्रभाव” विषय पर एक शोध संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और व्यावहारिक विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर एआई अनुसंधान को वास्तविक निर्णय-प्रक्रिया से जोड़ना है।
सरकार प्रतिभा विकास, स्टार्टअप समर्थन तथा शिक्षाविद्–उद्योग सहयोग को सुदृढ़ कर रही है, ताकि अनुसंधान के परिणाम बाज़ार की आवश्यकताओं के अनुरूप हों।
सरकार, वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने की परिकल्पना कर रही है। इस उद्देश्य से अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत की तकनीकी और वाणिज्यिक उपस्थिति को सशक्त बनाने हेतु अनेक नीतिगत उपाय एवं संस्थागत सुधार किए जा रहे हैं:
सरकार ने भारतीय अंतरिक्ष नीति, 2023 अधिसूचित की है, जिसमें इसरो, इन-स्पेस तथा उद्योग की भूमिकाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, जिससे संपूर्ण अंतरिक्ष मूल्य शृंखला में निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित हुई है।
गैर-सरकारी अंतरिक्ष गतिविधियों को अधिकृत, प्रोत्साहित और पर्यवेक्षण करने हेतु इन-स्पेस को एकल-खिड़की एजेंसी के रूप में स्थापित किया गया है। यह इसरो के प्रक्षेपण परिसर, परीक्षण सुविधाएँ, तकनीकी अवसंरचना और विशेषज्ञता तक पहुँच प्रदान करता है।
अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए 1,000 करोड़ रुपये का वेंचर कैपिटल फंड स्वीकृत किया गया है, जिसका संचालक इन-स्पेस है और जिसका प्रबंधन सिडबी वेंचर कैपिटल द्वारा किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप्स को प्रारंभिक एवं विकास पूंजी उपलब्ध कराना है।
इसके अतिरिक्त, इन-स्पेस ने 500 करोड़ रुपये का प्रौद्योगिकी अंगीकरण कोष प्रारंभ किया है, जिससे स्टार्टअप्स अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों का वाणिज्यीकरण कर सकें, विनिर्माण क्षमता बढ़ा सकें तथा आयात पर निर्भरता कम कर सकें।
अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ डी आई) मानदंडों को उदार बनाया गया है, जिसके अंतर्गत उपग्रह निर्माण एवं अवयवों में 100% तक एफडीआई की अनुमति तथा प्रक्षेपण यान एवं उपग्रह परिचालन में उच्च सीमा निर्धारित की गई है, जिससे वैश्विक पूंजी एवं प्रौद्योगिकी आकर्षित हो सके।
न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (एन एस आई अल) के माध्यम से सरकार लघु एवं मध्यम उपग्रहों के वाणिज्यिक प्रक्षेपण बाजार में भारत की भागीदारी का विस्तार कर रही है, जिसमें भारत की किफायती और विश्वसनीय प्रक्षेपण क्षमता का लाभ उठाया जा रहा है।
राष्ट्रीय मिशन एवं नीतिगत कार्यक्रम: नेशनल क्वांटम मिशन, इंडिया ए आई मिशन तथा अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (आर डी आई) फंड जैसी पहलें अनुप्रयुक्त अनुसंधान को प्रोत्साहित करने, वाणिज्यीकरण में तेजी लाने तथा निजी निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से संचालित की जा रही हैं।
अंतरिक्ष जैव-प्रौद्योगिकी: जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डी बी टी) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अंतरिक्ष जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग कर रहे हैं। इस क्षेत्र की प्रमुख प्राथमिकताओं में सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण अनुसंधान, अंतरिक्ष जैव-निर्माण, जैव-अंतरिक्ष यात्री विज्ञान तथा अंतरिक्ष जीवविज्ञान सम्मिलित हैं।दिल्ली। भारत का नवाचार इकोसिस्टम कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तथा संबंधित गहन प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में व्यापक शैक्षणिक अनुसंधान निष्कर्ष का प्रमाण देता है। स्टैनफोर्ड ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी रिपोर्ट 2025 में एआई प्रतिस्पर्धात्मकता एवं पारितंत्र की सजीवता के संदर्भ में भारत को विश्व में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है। भारत, गिटहब पर एआई परियोजनाओं में दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता भी है, जो भारत की सक्रिय एवं सशक्त डेवलपर समुदाय को दर्शाता है।
इंडिया ए आई मिशन:
भारत सरकार ने मार्च 2024 में देश में समग्र एआई पारितंत्र के विकास के लिए 10,372 करोड़ रुपये के प्रावधान के साथ इंडिया ए आई मिशन का शुभारंभ किया। 24 माह से भी कम समय में इस मिशन ने देश में एआई इको सिस्टम के विकास के लिए एक सुदृढ़ आधार स्थापित किया है:
कॉमन कम्प्यूटिंग सुविधा के लिए 38,000 से अधिक जीपीयू उपलब्ध कराए गए हैं, जिन्हें भारतीय स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों को किफायती दरों पर प्रदान किया जा रहा है।
स्वदेशी आधारभूत मॉडल अथवा लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) के विकास के लिए 12 टीमों का चयन किया गया है।
भारत-विशिष्ट एआई अनुप्रयोगों के विकास हेतु 30 प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई है।
प्रतिभा विकास के लिए 8,000 से अधिक स्नातक, 5,000 स्नातकोत्तर तथा 500 पीएचडी छात्रों को सहायता प्रदान किया जा रहा है।
27 इंडिया डेटा एवं एआई प्रयोगशालाएँ स्थापित की गई हैं तथा 543 अतिरिक्त प्रयोगशालाओं की पहचान की गई है।
भारत, एआई के विकास, उपयोग और सुरक्षा से संबंधित वैश्विक विमर्श को दिशा देने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। भारत ग्लोबल पार्टनरशिप ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (जी पी ए आई) का संस्थापक अध्यक्ष रहा है। भारत 16 से 20 फरवरी 2026 के बीच नई दिल्ली में इंडिया ए आई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन 2026 की मेजबानी कर रहा है। ऐसा पहली बार है जब यह वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन श्रृंखला, ग्लोबल साउथ में आयोजित की जा रही है, जो अधिक समावेशी वैश्विक एआई संवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है।
ए आई में निजी क्षेत्र का निवेश
सरकार की पहलों से प्रोत्साहित होकर निजी क्षेत्र भारत में एआई में निरंतर निवेश बढ़ा रहा है। स्टैनफोर्ड एआई इंडेक्स रिपोर्ट 2025 के अनुसार, वर्ष 2013 से 2024 के बीच भारत में एआई क्षेत्र में कुल निजी निवेश लगभग 11.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा है।
गूगल ने हाल ही में आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) हब स्थापित करने की घोषणा की है। लगभग 15 बिलियन अमेरिकी डॉलर का यह निवेश भारत में अब तक का गूगल का सबसे बड़ा निवेश है।
टाटा समूह ने महाराष्ट्र में एआई नवाचार नगरी स्थापित करने के लिए 11 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश की घोषणा की है।
इंडिया ए आई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन के दौरान “एआई और उसका प्रभाव” विषय पर एक शोध संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और व्यावहारिक विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर एआई अनुसंधान को वास्तविक निर्णय-प्रक्रिया से जोड़ना है।
सरकार प्रतिभा विकास, स्टार्टअप समर्थन तथा शिक्षाविद्–उद्योग सहयोग को सुदृढ़ कर रही है, ताकि अनुसंधान के परिणाम बाज़ार की आवश्यकताओं के अनुरूप हों।
सरकार, वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने की परिकल्पना कर रही है। इस उद्देश्य से अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत की तकनीकी और वाणिज्यिक उपस्थिति को सशक्त बनाने हेतु अनेक नीतिगत उपाय एवं संस्थागत सुधार किए जा रहे हैं:
सरकार ने भारतीय अंतरिक्ष नीति, 2023 अधिसूचित की है, जिसमें इसरो, इन-स्पेस तथा उद्योग की भूमिकाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, जिससे संपूर्ण अंतरिक्ष मूल्य शृंखला में निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित हुई है।
गैर-सरकारी अंतरिक्ष गतिविधियों को अधिकृत, प्रोत्साहित और पर्यवेक्षण करने हेतु इन-स्पेस को एकल-खिड़की एजेंसी के रूप में स्थापित किया गया है। यह इसरो के प्रक्षेपण परिसर, परीक्षण सुविधाएँ, तकनीकी अवसंरचना और विशेषज्ञता तक पहुँच प्रदान करता है।
अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए 1,000 करोड़ रुपये का वेंचर कैपिटल फंड स्वीकृत किया गया है, जिसका संचालक इन-स्पेस है और जिसका प्रबंधन सिडबी वेंचर कैपिटल द्वारा किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप्स को प्रारंभिक एवं विकास पूंजी उपलब्ध कराना है।
इसके अतिरिक्त, इन-स्पेस ने 500 करोड़ रुपये का प्रौद्योगिकी अंगीकरण कोष प्रारंभ किया है, जिससे स्टार्टअप्स अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों का वाणिज्यीकरण कर सकें, विनिर्माण क्षमता बढ़ा सकें तथा आयात पर निर्भरता कम कर सकें।
अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ डी आई) मानदंडों को उदार बनाया गया है, जिसके अंतर्गत उपग्रह निर्माण एवं अवयवों में 100% तक एफडीआई की अनुमति तथा प्रक्षेपण यान एवं उपग्रह परिचालन में उच्च सीमा निर्धारित की गई है, जिससे वैश्विक पूंजी एवं प्रौद्योगिकी आकर्षित हो सके।
न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (एन एस आई अल) के माध्यम से सरकार लघु एवं मध्यम उपग्रहों के वाणिज्यिक प्रक्षेपण बाजार में भारत की भागीदारी का विस्तार कर रही है, जिसमें भारत की किफायती और विश्वसनीय प्रक्षेपण क्षमता का लाभ उठाया जा रहा है।
राष्ट्रीय मिशन एवं नीतिगत कार्यक्रम: नेशनल क्वांटम मिशन, इंडिया ए आई मिशन तथा अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (आर डी आई) फंड जैसी पहलें अनुप्रयुक्त अनुसंधान को प्रोत्साहित करने, वाणिज्यीकरण में तेजी लाने तथा निजी निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से संचालित की जा रही हैं।
अंतरिक्ष जैव-प्रौद्योगिकी: जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डी बी टी) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अंतरिक्ष जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग कर रहे हैं। इस क्षेत्र की प्रमुख प्राथमिकताओं में सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण अनुसंधान, अंतरिक्ष जैव-निर्माण, जैव-अंतरिक्ष यात्री विज्ञान तथा अंतरिक्ष जीवविज्ञान सम्मिलित हैं।



