दिल्ली। केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास और संचार मंत्री, ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने नागालैंड के लिए क्लस्टर-आधारित ‘कॉफी मूल्य श्रृंखला विकास मिशन’ का शुभारंभ किया। इस गरिमामयी समारोह में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार; नागालैंड सरकार के मुख्यमंत्री श्री नेफियू रियो; नागालैंड सरकार के उपमुख्यमंत्री टी. आर. जेलियांग; नागालैंड सरकार के विधायक और सलाहकार (भूमि संसाधन) श्री जी. इकुतो झिमोमी; और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के सचिव संजय जाजू भी उपस्थित थे।

175 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ, “कॉफीज़ ऑफ़ नागालैंड” मिशन को ‘संपूर्ण-सरकार दृष्टिकोण’ के माध्यम से तैयार किया गया है। इसकी योजना सभी हितधारकों को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इसमें शामिल उपाय ज़मीनी वास्तविकताओं और कॉफी उत्पादक समुदायों की आकांक्षाओं के अनुसार हों।
यह मिशन, क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण के अनुसार तैयार किया गया है, जिसके तहत दो प्रायोगिक कॉफी क्लस्टरों की पहचान की गई है, कोहिमा ज़िले के तुओफेमा गाँव को ‘अरेबिका’ कॉफी के लिए और न्यूलैंड ज़िले के घोटोवी गाँव को ‘रोबस्टा’ कॉफी के लिए। इस पहल का उद्देश्य कॉफी मूल्य श्रृंखला में मौजूद महत्वपूर्ण कमियों को दूर करना है, जिसके लिए इसमें वृक्षारोपण विकास, कटाई के बाद का प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, मार्केटिंग, ट्रैसेबिलिटी (उत्पत्ति का पता लगाना), निर्यात, पर्यटन और क्षमता निर्माण को एकीकृत करके कॉफी मूल्य श्रृंखला की कमियों को दूर करना है।
केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस पहल पर ज़ोर दिया कि किसान पूरी कृषि मूल्य श्रृंखला में वास्तविक हितधारक बनें। इस सहयोगात्मक पहल पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा:
“यह केवल ‘संपूर्ण सरकार’ का दृष्टिकोण ही नहीं, बल्कि वास्तव में ‘संपूर्ण भारत’ का दृष्टिकोण है, जो सरकारों, मंत्रालयों, कॉफी उत्पादकों, उद्यमियों, प्रसंस्करण कर्ताओं, ब्रांडिंग विशेषज्ञों, निर्यातकों और बाज़ार के अग्रणियों को एक मंच पर लाता है।“
मंत्री महोदय ने बताया कि “कॉफ़ीज़ ऑफ़ नागालैंड” मिशन को एक पूर्ण-मूल्य-श्रृंखला विकास पहल के रूप में तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य नागालैंड को कच्चे कॉफ़ी उत्पादक क्षेत्र से बदलकर एक प्रीमियम, उत्पत्ति का पता लगाने योग्य और एकल-मूल कॉफ़ी अर्थव्यवस्था बनाना है, जिसकी घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में मज़बूत पहचान बन सके।
उन्होंने आगे बताया कि इस पहल का उद्देश्य ‘ब्रांड नॉर्थ ईस्ट’ के तहत “नागालैंड की कॉफ़ी” को बढ़ावा देना है। इसके लिए मीडिया अभियानों, व्यापार मेलों में भागीदारी और कॉफ़ी पर्यटन से जुड़े अनुभवों को बढ़ावा देने वाली पहलों का सहारा लिया जाएगा। इस मिशन का लक्ष्य पायलट क्लस्टरों में ‘कॉफ़ी बागानों में ठहरने की व्यवस्था’ और ‘खेत से कॉफी के कप तक’ पर्यटन अनुभवों को बढ़ावा देना भी है, ताकि पर्यटकों के सामने नागालैंड को विशेष प्रकार की कॉफ़ी के लिए एक खास और अनोखे उत्पादन स्थल के रूप में स्थापित किया जा सके।
मंत्री महोदय ने कहा कि इस पहल की असली सफलता तब दिखेगी, जब “नागालैंड की कॉफी” को घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय, दोनों ही बाजारों में खास जगह मिलेगी; साथ ही, इससे राज्य भर में कॉफी उत्पादकों के समुदायों के लिए ज़्यादा और संवहनीय आय भी सुनिश्चित होगी। उन्होंने किसानों और संबंधित पक्षों को भरोसा दिलाया कि सरकार नागालैंड के लिए एक विश्व-स्तरीय और प्रतिस्पर्धी ‘स्पेशलिटी कॉफी इकोसिस्टम’ तैयार करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने इस बात पर जोर दिया कि जैविक प्रमाणीकरण, जीआई टैगिंग और डिजिटल ट्रैकिंग को एकीकृत करके, यह कार्यक्रम किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा और छोटे किसान परिवारों को सशक्त बनाएगा। यह रणनीतिक रोडमैप न केवल प्रीमियम अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक सीधी पहुंच सुनिश्चित करता है, बल्कि इस क्षेत्र को स्थानीय ‘अनुभवात्मक पर्यटन’ से भी जोड़ता है, जिससे क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक और संवहनीय विकास सुनिश्चित होता है।
नागालैंड के मुख्यमंत्री ने ‘कॉफी मूल्य श्रृंखला विकास परियोजना’ की परिकल्पना और इसे समर्थन देने के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय की सराहना की। उन्होंने इसे राज्य की कृषि विविधीकरण और ग्रामीण विकास रणनीति में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि कई जिलों में ‘झूम खेती’ के एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में कॉफी की बागवानी उभरी है और इसमें कॉफी उत्पादक समुदायों के लिए दीर्घकालिक आय के अवसर पैदा करने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल संवहनीय कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देने की मजबूत क्षमता है।
पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के सचिव, श्री संजय जाजू ने अपने प्रारंभिक भाषण में मिशन के कार्यान्वयन ढांचे के बारे में विस्तार से बताया और प्रीमियम-गुणवत्ता वाली ‘अरेबिका’ और ‘रोबस्टा’ कॉफी के उत्पादन के लिए नागालैंड की कृषि-जलवायु स्थितियों की अपार क्षमता पर प्रकाश डाला। उन्होंने उल्लेख किया कि पिछले एक दशक में पूरे नागालैंड में कॉफी की खेती का काफी विस्तार हुआ है, लेकिन अब गुणवत्ता, उत्पादकता, मूल्य संवर्धन और बाजार तक पहुंच में सुधार के लिए प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने आगे इस बात पर जोर दिया कि क्लस्टर-आधारित मॉडल छोटे किसानों को साझा अवसंरचना, तकनीकी सहायता और ब्रांडिंग पहलों से सामूहिक रूप से लाभ उठाने में सक्षम बनाएगा।
इस पहल से स्थायी आजीविका के अवसर पैदा होने, बागानों पर उत्पादकों को फसलों का बेहतर मूल्य मिलने और कॉफी अर्थव्यवस्था में ग्रामीण युवाओं की भागीदारी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इस समारोह में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय और नागालैंड सरकार के अधिकारियों के साथ-साथ कॉफी उत्पादकों, उद्यमियों और अन्य हितधारकों ने भाग लिया।



