स्पिकमैके बिलासपुर की ओर से प्रख्यात कुचिपुड़ी कलाकार टी. रेड्डी लक्ष्मी का कार्यक्रम कांगेर वैली अकादमी रायपुर में हुआ। इस अवसर पर कलाकार ने अपनी अनूठी शैली और भावपूर्ण प्रस्तुति दी। शास्त्रीय परंपरा की गहराई और सौंदर्य को प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि संस्कृति से नारी सशक्त होती है। विद्यार्थियों से कलाकार ने संवाद कर भारतीय शास्त्रीय कलाओं की साधना, अनुशासन, तालमेल और महत्व को समझाया।

टी. रेड्डी की प्रस्तुति में दुर्गा स्तुति, कृष्ण लीला और महाभारत के द्रौपदी चीरहरण शामिल थे। उनके साथ सौम्या (वायलिन), विग्नेश (मृदंग), कोट्टकल (गायक) ने मिलकर लय, राग और अभिव्यक्ति का एक भावपूर्ण मिश्रण प्रस्तुत किया। विद्यालय के प्राचार्य श्री अभिजीत दास ने विशेष रूप से स्पिक मैके के कलाकारों का आभार प्रकट किया, जिन्होंने अपनी अनूठी प्रस्तुति से श्रोताओं को भारतीय शास्त्रीय संगीत और संस्कृति से जोड़ने का कार्य किया। साथ ही शिक्षकों और विद्यार्थियों के उत्साह और सहयोग को भी सराहा। श्री दास ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में कला और संगीत के प्रति संवेदनशीलता और भारतीय परंपराओं के संरक्षण की भावना जाग्रत करते हैं। स्पिक मैके (SPIC MACAY) की संस्थापक डॉ. किरण सेठ हैं, जिन्होंने 1977 में आईआईटी-दिल्ली में इस गैर-राजनीतिक, राष्ट्रव्यापी, स्वैच्छिक आंदोलन की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य युवाओं के बीच भारतीय शास्त्रीय संगीत और संस्कृति को बढ़ावा देना है।