जनगणना 2027 भारत की पहली डिजिटल जनगणना होगी, इसमें मोबाइल के माध्यम से डेटा संग्रह किया जाएगा, जिससे देश भर के आंकड़े अधिक तेज़ी और कुशलता से उपलब्ध हो सकेंगे।
राजनैतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 30 अप्रैल 2025 को हुई अपनी बैठक में, जनगणना 2027 में जातिगत गणना को शामिल करने का निर्णय लिया है।
सरकार ने जनगणना 2027 के लिए ₹11,718.24 करोड़ का महत्वपूर्ण बजटीय प्रावधान किया है, एक मजबूत संस्थागत ढांचे के साथ-साथ जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण और प्री-टेस्ट जैसी व्यापक प्रशासनिक तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं, ताकि पूरे देश में इस डिजिटल अभियान का निष्पादन पूरी सुगमता के साथ सुनिश्चित किया जा सके।
सुरक्षित ‘क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर’ (सीआईआई) घोषित डेटा केंद्रों और एक विशाल कार्यबल के साथ—जनगणना 2027 लक्षित और समावेशी नीति निर्धारण के लिए विश्वसनीय डेटा प्रदान करेगी।

जनगणना देश या किसी विशिष्ट क्षेत्र के सभी व्यक्तियों से संबंधित जनसांख्यिकीय, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक आंकड़ों के संग्रह, संकलन, विश्लेषण और प्रसार की प्रक्रिया है। जनगणना के माध्यम से एकत्रित सूचनाओं का विशाल भंडार इसे योजनाकारों, प्रशासकों, शोधकर्ताओं और अन्य डेटा उपयोगकर्ताओं के लिए आंकड़ों का सबसे समृद्ध स्रोत बनाता है। जनगणना गवर्नेंस के लिए एक महत्वपूर्ण आधार के रूप में कार्य करती है, जो राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में सक्षम बनाती है। जनगणना के आंकड़े ऐसी नीति निर्धारण प्रक्रिया को सुगम बनाते हैं जो समावेशी, लक्षित और जनसंख्या की विविध आवश्यकताओं के अनुरूप हो।
भारत में जनगणना के सबसे शुरुआती संदर्भ कौटिल्य के अर्थशास्त्र (321-296 ईसा पूर्व) में मिलते हैं और बाद के काल में सम्राट अकबर के शासनकाल के दौरान अबुल फजल की कृति ‘आइन-ए-अकबरी’ में भी इसका उल्लेख मिलता है। भारत में पहली आधुनिक जनगणना 1865 से 1872 के बीच आयोजित की गई थी, हालाँकि यह सभी क्षेत्रों में एक साथ नहीं हुई थी। भारत ने अपनी पहली समकालिक जनगणना 1881 में आयोजित की। तब से, भारतीय जनगणना हर 10 साल में आयोजित होने वाले व्यापक अभ्यासों के माध्यम से जनसंख्या के विभिन्न पहलुओं पर विश्वसनीय और समय की कसौटी पर खरे उतरे आंकड़े प्रदान कर रही है। प्रत्येक उत्तरवर्ती जनगणना ने जनसंख्या को बेहतर ढंग से समझने के लिए अपनी विधियों को परिष्कृत किया, कवरेज के दायरे को बढ़ाया और प्रश्नावली में आवश्यक बदलाव किए।
जनगणना 2027 भारतीय जनगणना की श्रृंखला में 16वीं और स्वतंत्रता के बाद की 8वीं जनगणना होगी। यह विश्व का सबसे बड़ा जनगणना अभियान होगा, जो डिजिटल समावेशन, मजबूत डेटा सुरक्षा और प्रक्रियाओं के सरलीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह साक्ष्य-आधारित नीति निर्धारण को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा। इसमें कई अग्रणी विशेषताओं को शामिल किया गया है, जैसे मोबाइल-आधारित डेटा संग्रह, जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (सीएमएमएस) पोर्टल के माध्यम से वास्तविक समय की निगरानी, वैकल्पिक स्व-गणना की सुविधा और सटीक भौगोलिक मानचित्रण का व्यापक उपयोग। जनसंख्या गणना के चरण के दौरान व्यापक जातिगत गणना भी की जाएगी।
अत्याधुनिक डिजिटल उपकरणों की सहायता से, इस अभियान का उद्देश्य डेटा सुरक्षा और जन-भागीदारी के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करते हुए, अधिक तीव्र, सटीक और विस्तृत आंकड़े प्रदान करना है।



