दिल्ली। नीलगिरी श्रेणी (प्रोजेक्ट 17ए) का छठा और इस श्रेणी का चौथा जहाज, महेंद्रगिरी (यार्ड 12654), जिसका निर्माण मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएसएल) में हुआ था, 30 अप्रैल 2026 को मुंबई स्थित एमडीएसएल में भारतीय नौसेना को सुपुर्द कर दिया गया। यह सुपुर्दगी युद्धपोत डिजाइन और निर्माण में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

प्रोजेक्ट 17ए फ्रिगेट बहुमुखी बहु-मिशन प्लेटफॉर्म हैं जिन्हें समुद्री क्षेत्र में वर्तमान और उभरती चुनौतियों का समाधान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह अत्याधुनिक फ्रिगेट नौसेना डिजाइन, स्टील्थ, मारक क्षमता, स्वचालन और उत्तरजीविता में एक अभूतपूर्व छलांग का प्रतीक है और युद्धपोत निर्माण में आत्मनिर्भरता का एक प्रशंसनीय प्रतीक है।
युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो (डब्ल्यूडीबी) द्वारा डिजाइन किए गए और युद्धपोत निरीक्षण दल (मुंबई) द्वारा पर्यवेक्षित पी17ए फ्रिगेट स्वदेशी जहाज डिजाइन, स्टील्थ क्षमता, टिकाऊपन और युद्ध क्षमता में एक पीढ़ीगत छलांग का प्रतीक हैं। एकीकृत निर्माण के सिद्धांत से प्रेरित होकर, जहाज का निर्माण और वितरण निर्धारित समयसीमा के भीतर किया गया।
पी17ए जहाजों में पी17 (शिवालिक-श्रेणी) की तुलना में उन्नत हथियार और सेंसर प्रणाली लगी हुई है। इन जहाजों में संयुक्त डीजल या गैस (सीओडीओजी) प्रणोदन संयंत्र लगे हैं, जिनमें एक डीजल इंजन और एक गैस टरबाइन शामिल हैं जो प्रत्येक शाफ्ट पर एक नियंत्रणीय पिच प्रणोदक (सीपीपी) और एक अत्याधुनिक एकीकृत प्लेटफॉर्म प्रबंधन प्रणाली (आईपीएमएस) को संचालित करते है। शक्तिशाली हथियार और सेंसर प्रणाली में सतह-रोधी, वायु-रोधी और पनडुब्बी-रोधी युद्ध प्रणालियां शामिल हैं।
महेंद्रगिरी छठा पी17ए जहाज है जिसे भारतीय नौसेना को 20 दिसंबर 2024 को एमडीएसएल द्वारा पहले पी17ए (नीलगिरी) की डिलीवरी के बाद 17 महीने से भी कम समय में सौंपा गया है। महेंद्रगिरी की सुपुर्दगी देश की डिजाइन, जहाज निर्माण और इंजीनियरिंग क्षमता को प्रदर्शित करती है और जहाज डिजाइन और जहाज निर्माण दोनों में आत्मनिर्भरता पर नौसेना के अटूट फोकस को दर्शाती है। 75 प्रतिशत स्वदेशी भागीदारी वाली इस परियोजना में एमडीएसएल के 200 से अधिक लघु एवं मध्यम उद्यम शामिल हैं। इसने प्रत्यक्ष रूप से लगभग 4,000 और अप्रत्यक्ष रूप से 10,000 से अधिक कर्मियों के लिए रोजगार सृजन किया है।



