रायपुर, 11 मार्च, 2026 – रायपुर संभाग के विज्ञान शोध छात्रों के लिए आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का दूसरा दिन आज शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम रुसा-2.0 के अंतर्गत आयोजित किया गया है। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के बारे में संयोजक समिति के सदस्य डॉ. गोवर्धन व्यास ने बताया कि दूसरे दिन शोध छात्रों को ’’कंप्यूटेशनल नैनोमटेरियल्स और उन्नत अनुसंधान तकनीकों’’ में नए दृष्टिकोण और व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
दिन का पहला तकनीकी सत्र ’’डॉ. बी. केशव राव, श्री शंकराचार्य तकनीकी परिसर, भिलाई’’ द्वारा संचालित किया गया। इस सत्र में उन्होंने ’’ग्राफीन में रेखीय दोषों का महत्व और नैनो-सेंसर प्रदर्शन पर उनका प्रभाव’’ समझाया। उन्होंने बताया कि कैसे ’’ग्रेन सीमाएँ और विस्तारित विस्थापन’’ विद्युत चालकता, पदार्थ की अवशोषण क्षमता और यांत्रिक स्थिरता को प्रभावित करते हैं। प्रतिभागियों को यह स्पष्ट रूप से समझ में आया कि संरचनात्मक दोषों का सही तरीके से उपयोग करके नैनो-सेंसर के प्रदर्शन को बेहतर बनाया जा सकता है। दिन का दूसरा तकनीकी सत्र भी ’’डॉ. बी. केशव राव’’ द्वारा संचालित किया गया, जिसमें उन्होंने ’’दोष प्रबंधन में व्यावहारिक रणनीतियों’’ पर प्रकाश डाला ताकि ग्राफीन आधारित सेंसर की संवेदनशीलता बढ़ाई जा सके। इस सत्र में प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और ’’सिंथेसिस और सिमुलेशन तकनीकों के वास्तविक अनुसंधान परियोजनाओं में उपयोग’’ के बारे में प्रश्न पूछे। तकनीकी सत्रों के बाद ’’व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र’’ आयोजित किया गया। इसमें संकाय सदस्य और शोध छात्र ’’लिनक्स वातावरण’’ में कार्य करते हुए ’’सांद्रता आधारित सैद्धांतिक विश्लेषण’’ और मॉडलिंग अभ्यास कर रहे थे। डॉ. राव ने दिखाया कि कैसे ’’2डी सामग्री की ज्यामितीय संरचना को परिभाषित किया जाता है, लैटिस मानों को अनुकूलित किया जाता है’’, और ’’सांद्रता और आंशिक सांद्रता डेटा तैयार किए जाते हैं।’’ प्रतिभागियों ने ’’ग्राफ तैयार करना और उनका विश्लेषण करना’’ सीखा, जिससे उन्हें नैनोमटेरियल अनुसंधान में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।
संयोजक समिति के सदस्य डॉ. लखपति पटेल ने कार्यक्रम और उद्देश्यों की रूपरेखा प्रस्तुत की, ताकि प्रतिभागियों को तकनीकी सत्रों और हैंड्स-ऑन अभ्यास में प्रभावी मार्गदर्शन मिल सके। कार्यक्रम का समन्वय ’’डॉ. अनिल रामटेक’’ ने किया, और धन्यवाद ज्ञापन ’’डॉ. नीरजा सेन’’ ने दिया। ’’डॉ. मंजु वर्मा, आईक्यूएसी संयोजक, ने बताया कि ऐसे कार्यक्रम महाविद्यालय के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, विशेषकर ’’नैक ग्रेडिंग’’ के संदर्भ में, और ये पहल शोध को और प्रोत्साहित करेंगी। अन्य समिति सदस्य डॉ. नियति गुरुद्वान और डॉ. वैषाली शारदे ने कार्यक्रम को समर्थन देने में सक्रिय भूमिका निभाई। उपस्थित संकाय सदस्यों में डॉ. भुवनेश्वरी वर्मा, डॉ. नम्रता दुबे, डॉ. अंजलि चंद्रवंशी आदि शामिल थे। इस प्रकार, कार्यक्रम के दूसरे दिन ने ’’सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ जोड़कर’’ प्रतिभागियों को ’’डिफेक्ट इंजीनियरिंग, सिमुलेशन रणनीतियों और नैनोमटेरियल नवाचारों’’ की समझ को और गहरा किया।
दिन के सत्रों के समापन पर, डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता, प्राचार्य एवं क्षेत्रीय अपर संचालक, रायपुर, ने शोध छात्रों और संकाय सदस्यों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की। उन्होंने ’’आधुनिक कंप्यूटेशनल उपकरणों को सुसंगत वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ जोड़ने’’ के महत्व को रेखांकित किया और प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान का उपयोग ’’शैक्षणिक और सामाजिक रूप से प्रासंगिक नवाचारों को बढ़ावा देने’’ के लिए करने के लिए प्रेरित किया।




