Wednesday, September 16, 2026
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असम की चाय, पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा देने वाला नया राजमार्ग लिंक

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दिल्ली। असम की एक कप चाय जब नाश्ते की मेज तक पहुंचती है, तब तक वह एक लंबी यात्रा तय कर चुकी होती है। इसकी शुरूआत उस चाय बागान से होती है, जहां पत्तियां तोड़ी जाती हैं; फिर वे उस कारखाने तक पहुंचती हैं, जहां उनका प्रसंस्करण किया जाता है; उसके बाद सडक से आगे बढती हैं; व्यापारियों और बाजारों से होकर गुजरती हैं और अंतत: उस शहर तक पहुंचती हैं, जहां असम की सबसे प्रसिद्ध फसल दैनिक जीवन की हिस्‍सा बन जाती है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने इस महीने की शुरुआत में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के 135.87 किलोमीटर लंबे, चार-लेन वाले, नियंत्रित प्रवेश वाले गुवाहाटी-तेजपुर कॉरिडोर के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह कॉरिडोर एनएच-15 का हिस्सा है और इस महत्वपूर्ण आर्थिक एवं संपर्क श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण नई कडी जोडेगा।

यह कॉरिडोर असम और अरुणाचल प्रदेश में आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों के बीच सपंर्क बेहतर बनाने के लिए प्रस्तावित है। इसका निर्माण 8,970.20 करोड़ रुपये की कुल पूंजीगत लागत विकसित किया जाएगा और यह गुवाहाटी के निकट बैहाटा चारियाली को तेजपुर से जोड़ेगा। इसमें 15.11 किलोमीटर लंबा मंगलदोई बाईपास शामिल नहीं है। इस परियोजना को बिल्ट-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओटी) टोल मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा।

इस कॉरिडोर से औसत यात्रा गति में शत प्रतिशत की वृद्धि, यात्रा समय में 50 प्रतिशत की कमी, ईंधन दक्षता में सुधार करेगा और वाहनों की परिचालन लागत में कमी आने की उम्मीद है। परियोजना में 58.7 किलोमीटर लंबे पांच प्रमुख बाईपास का निर्माण भी शामिल है। इनका उद्देश्य बैहाटा चारियाली, सिपाझार, खारूपेटिया, डेकियाजुली और तेजपुर के आसपास यातायात की भीड़ को कम करना है। यह कॉरिडोर असम के गुवाहाटी को अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर और पासीघाट से जोड़ने वाले राजमार्ग संपर्क का भी एक महत्वपूर्ण घटक बनेगा, जिससे क्षेत्रीय संपर्क मजबूत होगा और उत्तर-पूर्व क्षेत्र में आवागमन बेहतर होगा।

चाय व्‍यापार के संवर्धन का आधार अच्‍छी सडकें

असम का चाय उद्योग पहले से ही औपचारिक बाजारों से गहराई से जुड़ा हुआ है। टी बोर्ड इंडिया गुवाहाटी में नीलामी से संबंधित अवसंरचना का संचालन करता है और इस केंद्र के लिए साप्ताहिक नीलामी आंकडे प्रकाशित करता है। यह क्षेत्र के चाय व्यापार में गुवाहाटी की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है।

अधिक सुगम और पूर्वानुमानित राजमार्ग यात्रा इस पूरी श्रृंखला के कई चरणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। चाय उत्पादकों और परिवहनकर्ताओं के लिए बेहतर सड़क का लाभ केवल इस बात से नहीं मापा जाता कि वाहन कितनी जल्दी अपने गंतव्य तक पहुंचता है। इसका मूल्य विश्वसनीयता से भी जुडा है: कम रुकावटें, अधिक पूर्वानुमानित यात्रा, वाहनों की कम संचालन लागत और माल की सुचारू आवाजाही।

गुवाहाटी-तेजपुर कॉरिडोर की व्यापक भूमिका भी यही परिकल्पित की गई है। इस परियोजना की योजना यात्रियों और माल की तेज और सुरक्षित आवाजाही के साथ-साथ कृषि क्षेत्रों, उद्योगों और व्यापार मार्गों को जोड़ने के लिए बनाई गई है।

जब चाय बागानों का क्षेत्र एक पर्यटन स्थल बन जाता है

इसी यात्रा में एक और अवसर छिपा है: चाय पर्यटन। असम के चाय बागानों का आकर्षण केवल चाय तक ही सीमित नहीं है। चाय से जुड़े बागान, कारखाने, विरासत और संस्कृति एक व्यापक पर्यटन अनुभव का हिस्सा बन सकते हैं।

नए कॉरिडोर से मां कामाख्या मंदिर, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और ओरंग राष्ट्रीय उद्यान जैसे महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी में सुधार होने की उम्मीद है, साथ ही इस पूरे क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक केंद्रों तक पहुंच भी बेहतर होगी। इससे गुवाहाटी, तेजपुर और व्यापक उत्तर असम क्षेत्र को जोड़ने वाले मजबूत पर्यटन सर्किट विकसित होने की संभावना बनेगी।

व्यापक आर्थिक क्षितिज वाला राजमार्ग

इस कॉरिडोर का विस्तार महत्वपूर्ण है। चार लेन वाले एक्सेस कंट्रोल राजमार्ग के साथ परियोजना में 15 बड़े पुल, 30 छोटे पुल, 19 फ्लाईओवर, एक हाथी अंडरपास (तेजपुर बाईपास में), 46 अंडरपास और 210 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड का प्रावधान है, ताकि कॉरिडोर को एक्सेस- कंट्रोल्ड के रूप में विकसित करते हुए क्रॉस-मुवमेंट बनाए रखा जा सके।

इसे पीएम गतिशक्ति के 8 आर्थिक केंद्रों, 2 सामाजिक केंद्रों, 3 पर्यटन केंद्रों और 7 लॉजिस्टिक्स केंद्रों से जोड़ने के लिए भी डिजाइन किया गया है, जिनमें 3 प्रमुख रेलवे स्टेशन, 2 हवाई अड्डे और 2 जलमार्ग टर्मिनल शामिल हैं।

केवल एक सड़क नहीं: शहरों में यातायात का दबाव कम करना, असम को मज़बूत बनाना

तेज़ यातायात के अलावा यह परियोजना रणनीतिक और शहरी आवागमन के संबंधित लाभ की प्रदान करेगी। इसमें तेज़पुर बाईपास पर 4.9 किलोमीटर लंबी आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ईएलएफ) का प्रावधान है, जिसे भारतीय वायु सेना के समन्वय से विकसित करने की योजना है। साथ ही, यह ब्रह्मपुत्र के दक्षिणी तट के साथ मौजूदा एनएच-27 पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर पर यातायात का दबाव कम करने में भी सहायक होगी। यह कॉरिडोर कुल 58.7 किलोमीटर में फैले पांच प्रमुख बाईपासों से सुसज्जित होगा, जो बैहाटा चारियाली, सिपाझार, खारूपेटिया, डेकियाजुली और तेज़पुर सहित घनी आबादी वाले शहरों से दूर भारी यातायात को डाईवर्ड करेगा, जिससे भीड-भाड कम होगी और स्थानीय समुदायों के लिए सड़क सुरक्षा में सुधार होगा।

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