Saturday, August 30, 2025
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देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र के 45,934 गांवों में से 42,093 गांव मोबाइल कनेक्टिविटी से जुड़े: केंद्र

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संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने संसद को बताया कि जून 2025 तक, पूर्वोत्तर क्षेत्र के 45,934 गांवों में से (भारत के महापंजीयक के आंकड़ों के अनुसार), 42,093 गांव मोबाइल कनेक्टिविटी से जुड़ चुके हैं और इनमें से 40,663 गांवों में 4G मोबाइल कनेक्टिविटी है।

बुधवार को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में चंद्रशेखर ने लोकसभा को जानकारी दी कि किसी भी अछूते बसे हुए गांव में मोबाइल कवरेज तकनीकी-व्यावसायिक व्यवहार्यता के आधार पर दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) द्वारा प्रदान की जाती है। सरकार, डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) के वित्तपोषण के माध्यम से, पूर्वोत्तर सहित देश के ग्रामीण, दूरस्थ और सीमावर्ती क्षेत्रों में मोबाइल टावरों की स्थापना के माध्यम से दूरसंचार कनेक्टिविटी के विस्तार हेतु विभिन्न परियोजनाओं एवं योजनाओं को क्रियान्वित कर रही है।

पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए व्यापक दूरसंचार विकास योजना (सीटीडीपी) के अंतर्गत डीबीएन परियोजनाएं, क्षेत्र की वंचित आबादी तक मोबाइल नेटवर्क की पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से, राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे के गांवों और क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए हैं। जून 2025 तक, पूर्वोत्तर क्षेत्र में डीबीएन योजनाओं के अंतर्गत 2,485 मोबाइल टावर चालू हो चुके हैं, जो 3,389 गांवों या स्थानों को मोबाइल कनेक्टिविटी प्रदान कर रहे हैं।

वहीं, भारतनेट परियोजना को चरणबद्ध तरीके से क्रियान्वित किया जा रहा है ताकि सभी ग्राम पंचायतों (जीपी) को वाई-फाई हॉटस्पॉट, फाइबर टू द होम (एफटीटीएच) कनेक्शन आदि जैसी ब्रॉडबैंड सेवाओं से जोड़ा जा सके।

इसके अलावा, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश के सभी जीपी को रिंग टोपोलॉजी में कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए संशोधित भारतनेट कार्यक्रम को मंज़ूरी दे दी है, जिसमें मौजूदा नेटवर्क को अपग्रेड करना और मांग के आधार पर लगभग 3.8 लाख गैर-जीपी गांवों को कनेक्टिविटी प्रदान करना शामिल है।

जून 2025 तक, पूर्वोत्तर क्षेत्र में भारतनेट परियोजना के तहत 6,355 जीपी को सेवा के लिए तैयार कर दिया गया है और 12,283 एफटीटीएच कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं।

दरअसल, डीबीएन परियोजनाओं के तहत प्रदान की गई दूरसंचार कनेक्टिविटी से दूरस्थ और सीमावर्ती जिलों में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और ई-गवर्नेंस के लिए संचार और डिजिटल सेवाओं तक समान पहुंच संभव हुई है।

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