उत्तर प्रदेश के आगरा ज़िले में रहने वाले 29वर्ष के रेहान (बदला हुआ नाम) को शराब की लत के कारण गंभीर निजी, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हाई-स्कूल तक पढ़े और बेरोज़गार होने के कारण, रेहान आत्मविश्वास की कमी, मानसिक अस्थिरता और अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता से जूझ रहा था।

अपने घर के अस्थिर माहौल की वजह से उसकी लत छोड़ने की प्रक्रिया और मुश्किल हो रही थी। रेहान के पिता को भी शराब की लत थी, जिससे उसको दोबारा शराब की लत लगने का खतरा बढ़ गया और पूरे परिवार पर अत्यधिक भावनात्मक और आर्थिक दबाव पड़ा। लत छोड़ने के शुरुआती चरण में, रेहान को बेचैनी, नींद न आना और मानसिक अस्थिरता जैसे शराब छोड़ने के गंभीर लक्षणों का सामना करना पड़ा। इन मुश्किलों का उसके आत्मविश्वास और सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ा।
परिवार में पैसे की कमी से हालात और मुश्किल हो गए। उसका परिवार मुख्य रूप से शाम को लगने वाले खाने के एक छोटे से स्टॉल से होने वाली मामूली आय पर निर्भर था। कम पढ़ाई की वजह से रेहान के लिए रोजगार के अवसर सीमित थे और बेरोज़गारी के कारण उसे घर में आर्थिक मदद न कर पाने का पछतावा और निराशा थी। सामाजिक बदनामी और लगातार अनुकूल माहौल नहीं मिलने से भी उसकी लत छोड़ने की राह में रुकावटें उत्पन्न हुईं।
इन चुनौतियों के बावजूद, रेहान ने अपनी ज़िंदगी को फिर से संवारने का दृढ़ संकल्प कर रखा था। उसकी इच्छा पूरी तरह शराब छोड़ने, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने और अपने परिवार का सहारा बनने की थी। उसे आगरा में ज़िला नशा-मुक्ति केंद्र की मदद से चलाए जा रहे सामान्य ड्यूटी सहायता कार्यक्रम को पूरा करने और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में स्थायी नौकरी पाने की भी उम्मीद थी।
20 जनवरी 2026 को, रेहान को आगरा के ज़िला नशा-मुक्ति केंद्र, ‘सामूहिक उत्थान सेवा समिति’ से मदद मिली। उसे मुफ़्त इलाज और पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) की सुविधाएं दी गईं, जिनमें परामर्श (काउंसलिंग), लत छोड़ने में मदद करना और नियमित फ़ॉलो-अप शामिल थे। इन सुविधाओं से उसे शराब की लत, नशा छोड़ने से जुड़ी मुश्किलों से निपटने और धीरे-धीरे अपने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिली।
लगातार काउंसलिंग और उसके बाद की सहायता ने रेहान का आत्मविश्वास बढ़ाने और लत छोड़ने के प्रति उनके संकल्प को मज़बूत करने में अहम भूमिका निभाई। इस सहायता से उसे सकारात्मक नज़रिया अपनाने, फिर से जीवन के उद्देश्य को समझने और सामाजिक तथा आर्थिक रूप से समाज में दोबारा शामिल होने के लिए स्वयं को तैयार करने में मदद मिली।
रेहान की लगन और केंद्र से लगातार मिली मदद से आखिरकार एक बड़ा बदलाव आया। उसे एक निजी अस्पताल में नौकरी मिल गई, जो स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में काम करने की उनकी इच्छा को पूरा करने की दिशा में एक अहम कदम था।
नौकरी मिलने से उसकी आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है और वह आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बन गया है। इससे उसका आत्मविश्वास भी लौटा है और उसे अपने परिवार के कल्याण में योगदान देने का अवसर भी मिला है।
रेहान का सफ़र दर्शाता है कि कैसे सही समय पर इलाज, काउंसलिंग, रिहैबिलिटेशन और लगातार फ़ॉलो-अप सहायता से कोई व्यक्ति शराब की लत से उबर सकता है और सम्मान से अपनी ज़िंदगी फिर से शुरू कर सकता है। बेरोज़गारी और मानसिक परेशानी से लेकर लत छोड़ने और सार्थक नौकरी पाने तक की उसकी कहानी उम्मीद, हिम्मत और नशा-मुक्ति की व्यापक सेवाओं के बदलाव लाने वाले प्रभाव की एक प्रेरणादायक मिसाल है।



