Friday, September 11, 2026
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बस्तर से ऑक्सफोर्ड तक : छत्तीसगढ़ की पहली सामाजिक विज्ञान प्रयोगशाला के निर्माता विनायक कोहली बने देश के सबसे युवा ‘बेस्ट टीचर‘

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ऑक्सफोर्ड सईद बिज़नेस स्कूल एवं शिव नादर फाउंडेशन द्वारा आयोजित इंडियाज़ बेस्ट टीचर्स अवार्ड्स 2026 में भूगोल श्रेणी का राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय कोण्डागांव के सामाजिक विज्ञान शिक्षक श्री विनायक कोहली का मंगलवार को कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी नूपुर राशि पन्ना द्वारा कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  अविनाश भोई तथा अपर कलेक्टर अजय उरांव एवं जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारीगण, विकासखण्ड शिक्षा अधिकारीगण, विद्यालयों के प्राचार्यगण, शिक्षकगण तथा विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

भरतनाट्यम नमस्कारम से हुआ प्रस्तुतिकरण का शुभारंभ
लगभग तीस मिनट के अपने प्रस्तुतिकरण की शुरुआत श्री कोहली ने भरतनाट्यम की पारम्परिक नमस्कारम मुद्रा से की। सात वर्षों से भरतनाट्यम का प्रशिक्षण प्राप्त श्री कोहली ने इस माध्यम से अपनी बात का मूल संदेश उपस्थित शिक्षकों तक पहुँचाया उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिक्षक के पास अपने विषय से परे भी कोई न कोई कला, कौशल अथवा रुचि होती है, और उसे कक्षा-शिक्षण से जोड़ देने पर अध्यापन कहीं अधिक प्रभावी और जीवंत हो जाता है।

साढ़े नौ हज़ार से अधिक शिक्षकों में से चयन
श्री कोहली ने बताया कि इस राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए देशभर से नौ हज़ार पाँच सौ से अधिक शिक्षकों ने आवेदन किया था। चयन प्रक्रिया तीन चरणों में सम्पन्न हुई। अंतिम चरण के लिए उन्हें दिल्ली आमंत्रित किया गया, जहाँ ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों एवं अन्य विशिष्टजनों के समक्ष उन्होंने अपना प्रस्तुतिकरण दिया। इसी प्रस्तुतीकरण के आधार पर उन्हें भूगोल श्रेणी में देश का सर्वश्रेष्ठ शिक्षक चुना गया।

 कोण्डागांव की संस्कृति बनी अंतरराष्ट्रीय मंच की पहचान
श्री कोहली ने कहा कि इस उपलब्धि का श्रेय अकेले उन्हें नहीं, बल्कि कोण्डागांव की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, यहाँ के शिल्पकारों-कलाकारों तथा उनके विद्यार्थियों को जाता है। बस्तर की मिट्टी, यहाँ की शिल्पकला और स्थानीय परम्पराओं को अपने विषय-ज्ञान से जोड़कर ही वे इस विषयवस्तु को अंतरराष्ट्रीय मंच तक ले जा सके। उन्होंने कहा कि कोण्डागांव की संस्कृति को इस स्तर पर प्रस्तुत कर पाना उनके लिए गर्व का विषय है।

नवाचारी शिक्षण पद्धतियों का प्रस्तुतिकरण
अपने प्रस्तुतिकरण में श्री कोहली ने विद्यालय में अपनाई जा रही अनेक नवाचारी शिक्षण पद्धतियों को साझा किया, जिनमें प्रमुख रूप से सम्मिलित थीं, जिसमें ‘सामाजिक विज्ञान प्रयोगशाला, जो सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ में अपनी तरह की पहली प्रयोगशाला है, बस्तर आर्ट म्यूज़ियम कॉर्नर, भूमिका-निर्वाह (रोल-प्ले) आधारित गतिविधियाँ, विद्यार्थियों के साथ नियमित ध्यान (मेडिटेशन) सत्र, युवा संसद का आयोजन, मानचित्रण (मैपिंग) गतिविधियाँ, मृदा नमूना संग्रहण कार्य, कला-एकीकृत शिक्षण हेतु भरतनाट्यम का उपयोग’ जैसे नवाचार शामिल है। उन्होंने पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय कोण्डागांव में अन्य शिक्षकों द्वारा अपनाई जा रही उत्कृष्ट शिक्षण पद्धतियों का भी उल्लेख किया।

मोबाइल पर बढ़ती निर्भरता पर चिंता
श्री कोहली ने बच्चों में बहुत कम आयु से ही मोबाइल फोन तथा अन्य उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता पर गम्भीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों की सोचने-समझने की क्षमता कमज़ोर हो रही है। इसका समाधान बताते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सिद्धांतों तथा जीन पियाजे जैसे मनोवैज्ञानिकों के रचनावादी (ब्वदेजतनबजपअपेज) दृष्टिकोण को अपनाते हुए हस्त-कौशल आधारित (ींदके-वद), अनुभवात्मक तथा खिलौना-आधारित आनंददायी शिक्षण गतिविधियों को कक्षा में स्थान देना चाहिए।

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