रायगढ़। ओ. पी. जिंदल विश्वविद्यालय, रायगढ़ में स्कूल ऑफ़ साइंस के भौतिकी विभाग ने 10-14 फरवरी 2025 के दौरान ‘टेक्निक्स एन्ड टूल्स फॉर शेपिंग द फ्यूचर ऑफ़ एनर्जी मैटेरियल्स’ विषय पर एक सप्ताह की कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया। ऑनलाइन माध्यम से 10 फरवरी से 14 फरवरी 2025 के दौरान आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं और उद्योग के पेशेवरों को एक मंच पर लाकर प्रतिभागियों को उन्नत ऊर्जा सामग्री के डिजाइन, संश्लेषण और लक्षण वर्णन में व्यापक ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था।
कार्यशाला में सौर कोशिकाओं, बैटरी, ईंधन कोशिकाओं और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के लिए सामग्री पर ध्यान केंद्रित करते हुए, टिकाऊ ऊर्जा समाधानों के विकास के लिए आवश्यक अत्याधुनिक तकनीकों, कम्प्यूटेशनल उपकरणों और प्रयोगात्मक विधियों के बारे में जानकारी प्रदान करना था। साथ ही साथ प्रतिभागियों को ऊर्जा सामग्री में नवीनतम नवाचारों के बारे में तथा स्वच्छ ऊर्जा के भविष्य को आकार देने में उनकी भूमिका से अवगत भी कराना था । यह कार्यक्रम शोध, नवाचार और शिक्षण के क्षेत्र में नई दिशा देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था, जिसमें देशभर के प्रतिष्ठित शिक्षकों, विशेषज्ञों और शोधार्थियों ने भाग लिया और अपना ज्ञानवर्धन किया।
10 फरवरी को आयोजित उदघाटन समारोह में स्कूल ऑफ़ साइंस के डीन डॉ गिरीश चंद्र मिश्रा ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया और अद्यतन विषय पर कार्यशाला आयोजित करने के लिए भौतिकी विभाग को बधाई दिया। उन्होंने कहा की यह कार्यशाला ऊर्जा सामग्री के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए हमारी निरंतर प्रतिबद्धता में एक महत्वपूर्ण पहल का प्रतिनिधित्व करती है। स्वच्छ, अधिक कुशल ऊर्जा स्रोतों की बढ़ती आवश्यकता यह आवश्यक बनाती है कि हम सीखने और सहयोग के माहौल को बढ़ावा देना जारी रखें, और यह कार्यशाला प्रतिभागियों को अपने ज्ञान का विस्तार करने और अत्याधुनिक विकास से जुड़ने के लिए एक आदर्श मंच प्रदान करती है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ बिजय कुमार दास, साइंटिस्ट (ARCI- हैदराबाद) ने कार्यशाला के आयोजन के लिए ओ. पी. जिंदल विश्वविद्यालय और स्कूल ऑफ़ साइंस को बधाई दिया, और कहा की ऊर्जा का भविष्य अभिनव अनुसंधान और उन्नत सामग्रियों के विकास के हाथों में है जो ऊर्जा के उत्पादन, भंडारण और उपयोग के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं। मैं सीखने और सहयोग के लिए यह मंच प्रदान करने के लिए आयोजकों की सराहना करता हूं, और सभी प्रतिभागियों को सक्रिय रूप से शामिल होने, विचारों का आदान-प्रदान करने और आगे आने वाली संभावनाओं से प्रेरित होने के लिए प्रोत्साहित करता हूं।आशा करता हूँ की यहां प्राप्त चर्चाएं और अंतर्दृष्टि भविष्य की पीढ़ियों के लिए अधिक टिकाऊ और ऊर्जा-कुशल दुनिया को आकार देने में महत्वपूर्ण योगदान देंगी। उद्घाटन समारोह के पश्चात तकनिकी सत्रों एवं हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग सत्रों का आयोजन किया गया। जिसमे सभी प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यशाला के संयोजक डॉ राम सेवक सिंह ने बताया की एक सप्ताह की इस ऑनलाइन कार्यशाला में प्रसिद्ध वक्ताओं और वैज्ञानिकों द्वारा विशेषज्ञ सत्र, उपकरणों का व्यावहारिक प्रदर्शन और हैंड्स-ऑन-ट्रेनिंग प्रदान किया गया। इस कार्यशाला में उद्घाटन सत्र, 6 व्याख्यान सत्रों, 5 उपकरण प्रदर्शन सत्रों और समापन सत्र सहित कुल 13 सत्र आयोजित किए गए, जिसमे डॉ सुनील कुमार सिंह, एसोसिएट प्रोफ़ेसर (भौतिकी विभाग आईआईटी -BHU), डॉ विजय कुमार दास, साइंटिस्ट (ARCI- हैदराबाद), डॉ अशोक कुमार , एसोसिएट प्रोफ़ेसर (NITTTR -चंडीगढ़), डॉ जय सिंह, प्रोफ़ेसर (भौतिकी विभाग-GGU, बिलासपुर ) एवं डॉ वरुण राय (एसोसिएट प्रोफ़ेसर, इलाहाबाद) आदि के व्याख्यान हुए। साथ ही साथ स्कूल ऑफ़ साइंस के प्राध्यापकों द्वारा उपकरण प्रदर्शन एवं हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग प्रदान किया गया। इस कार्यशाला में भारत के विभिन्न संस्थानों जैसे आईआईटी, एनआईटी, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों से लगभग 117 प्रतिभागी कार्यशाला में शामिल हुए।
14 फरवरी को कार्यक्रम के समापन समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. डॉ वरुण राय ने कहा की इस कार्यशाला के माध्यम से अभूतपूर्व शोध, नवीन तकनीकों और नवीनतम उपकरणों से प्रतिभागियों को परिचित कराया गया है , जो ऊर्जा सामग्रियों के भविष्य को आकार देने और ऊर्जा परिदृश्य में क्रांति लाने की क्षमता रखते हैं। प्रतिभागियों के इतने विविध समूह – छात्र, शोधकर्ता और पेशेवर – को ज्ञान और विचारों को साझा करने के लिए एक साथ आते देखना प्रेरणादायक है। इस कार्यशाला के दौरान आयोजित चर्चाएँ निस्संदेह संधारणीय ऊर्जा समाधानों को आगे बढ़ाने में योगदान देंगी। उन्होंने आयोजकों, वक्ताओं और प्रतिभागियों को उनके बहुमूल्य योगदान के लिए हार्दिक बधाई दिया और आशा व्यक्त किया की कि यहाँ प्राप्त ज्ञान शोध और नवाचार के प्रति जुनून को बढ़ावा देगा, और सभी को भविष्य की चुनौतियों के लिए परिवर्तनकारी समाधान खोजने की दिशा में प्रयास जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
कार्यक्रम के अंत में मानविकी विभाग के प्राध्यापक डॉ संजय कुमार सिंह ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ आर. डी. पाटीदार जी एवं आयोजन में सहयोग देनेवाले सभी प्राध्यापकों, आयोजन समिति के सभी सदस्यों एवं आईटी विभाग के सहयोगियों के प्रति कार्यक्रम के सफल आयोजन में अनवरत सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। इस कार्यक्रम के आयोजन में डॉ अंकुर रस्तोगी, डॉ दीप्ती शुक्ला, डॉ तनियासेन राठौर , डॉ शुभाश्री, डॉ दीपक पटेल, डॉ अरिंदम पात्रा, डॉ कुबेरनाथ मिश्रा, डॉ सौम्या सिंह, डॉ स्वाती वर्मा, डॉ देबस्मिता सामल एवं अन्य सभी प्राध्यापकों एवं शोध छात्रों का विशेष योगदान रहा।
स्कूल ऑफ़ साइंस द्वारा वर्तमान की आवश्यकताओं को ध्यान रखते हुए जरुरी विषय पर कार्यशाला के आयोजन के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ आर. डी. पाटीदार ने स्कूल ऑफ़ साइंस एवं आयोजन समिति के सभी सदस्यों को बधाई दिया और प्रेरित किया की इस तरह के आयोजन निश्चित अंतराल में सतत रूप से आयोजित किये जाने चाहिए जिससे छात्रों और शिक्षकों में सम्बंधित क्षेत्र में नवाचार के प्रति उत्साह बना रहे।