Tuesday, July 14, 2026
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छत्तीसगढ़ में जनजातीय विकास को मिल रही अभूतपूर्व गति : मुख्यमंत्री साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास के जनदर्शन हॉल में आयोजित भारतीय आदिम जाति सेवक संघ के छत्तीसगढ़ राज्य बोर्ड के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने नवनियुक्त पदाधिकारियों एवं सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और छत्तीसगढ़ में जनजातीय विकास को अभूतपूर्व गति मिली है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संघ का नवगठित राज्य बोर्ड आदिवासी समाज के उत्थान, उनके अधिकारों की रक्षा तथा सामाजिक विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।कार्यक्रम में भारतीय आदिम जाति सेवक संघ के अध्यक्ष प्रकाश कुमार उइके, कौशल्या साय, राजेश मालवीय, कुंवर जितेंद्र नरसिंह राणा सहित संघ के सदस्यगण एवं विभिन्न राज्यों से आए पदाधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ जनजातीय बहुल राज्य है, जहां विशेष पिछड़ी जनजातियों सहित अनेक जनजातीय समुदाय अपनी समृद्ध परंपराओं, संस्कृति और जीवन मूल्यों के साथ निवास करते हैं। ऐसे राज्य में भारतीय आदिम जाति सेवक संघ के छत्तीसगढ़ राज्य बोर्ड का गठन अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संघ का इतिहास गौरवपूर्ण रहा है और यह संस्था लंबे समय से देशभर में आदिवासी समाज के कल्याण एवं उत्थान के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय आदिम जाति सेवक संघ की ऐतिहासिक भूमिका का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद इसके प्रथम अध्यक्ष रहे, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री श्री मोरारजी देसाई ने भी इस प्रतिष्ठित संस्था का नेतृत्व किया। उन्होंने नवनियुक्त राज्य बोर्ड के सभी सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए देश के विभिन्न राज्यों से आए संघ के पदाधिकारियों का छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर आत्मीय स्वागत किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य कर रही है। आज बस्तर क्षेत्र विकास के नए युग में प्रवेश कर चुका है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, विद्युत, संचार और अन्य मूलभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। पर्यटन के क्षेत्र में भी बस्तर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। यहां की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और परंपराओं को जानने-समझने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं तथा स्थानीय होमस्टे में ठहरकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत चार दशकों में बस्तर के अनेक क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से वंचित रहे और लगभग 400 गांवों का विधिवत सर्वेक्षण तक नहीं हो पाया था। वर्तमान सरकार ने इन गांवों का सर्वे कर विकास कार्यों को गति दी है। उन्होंने बताया कि नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत 500 से अधिक गांवों तक सड़क, पेयजल सहित अन्य बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई गई हैं। इन क्षेत्रों में लोगों के राशन कार्ड बनाए जा रहे हैं, नई उचित मूल्य की दुकानों का संचालन प्रारंभ हुआ है तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी तेजी से लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर योजना के अंतर्गत घर-घर जाकर स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है, ताकि दूरस्थ अंचलों में रहने वाले लोगों को समय पर उपचार और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। इसके साथ ही बस्तर मुन्ने कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है, जिसका अर्थ है ‘अग्रणी बस्तर’। इस पहल के माध्यम से सुदूर वनांचलों तक शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से पहुंचाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और जीवन मूल्यों का संरक्षण करते हुए उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आजीविका और आर्थिक अवसरों से जोड़ना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय आदिम जाति सेवक संघ का छत्तीसगढ़ राज्य बोर्ड समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ते हुए जनजातीय विकास के प्रयासों को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान करेगा।

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